आयुर्वेद के जाने माने हस्ताक्षर आचार्य बालकृष्ण जी महाराज का जन्म
सुमित्रा देवी व श्री जय वल्लभ जी के घर-आंगन में हुआ। माता-पिता के स्नेह व
गुरुओं के आशीर्वाद से बालकृष्ण जी महाराज ने संस्कृत व आयुर्वेद का विशेष
अध्ययन किया। स्वामी रामदेव द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय स्वाभिमान
आंदोलन के अगुआ के रूप में आपने लोगों में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का कार्य
किया है।
आचार्य बालकृष्ण जी मनस्वी तथा तपस्वी ब्रह्मचारी हैं। इन्होंने आत्मसाधना के साथ-साथ राष्ट्रसेवा को अपना धर्म समझा है। आचार्य बालकृष्ण का यह मानना है कि हर व्यक्ति के जीवन का एक लक्ष्य होता है और वह व्यक्ति अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लक्ष्य भेदन की ओर अग्रसर होता है। विश्वविख्यात पंतजलि योग पीठ में आचार्य बालकृष्ण की प्रतिष्ठा और सम्मान वर्तमान धन्वंतरि के रूप में हो रही है। आचार्य बालकृष्ण जी एक बहुत बड़ी संहिता लिख रहे हैं, जिसमें 5000 जड़ी-बूटी के बारे में वर्णन किया गया है। अभी तक इतिहास में केवल500 जड़ी-बूटी के बारे में ही लोगों को पता चल पाया है। आचार्य जी अनेक रोगियों को स्वस्थ्य कर चुके हैं, इन्होंने अब तक करीब दस लाख रोगियों को देखा है, जिनमें से आठ लाख लोगों का दस्तावेज प्रमाण भी मौजूद है। पंतजलि योग पीठ में हर दिन देश के अलग-अलग क्षेत्रों के लोग अपने रोगों का निदान कराने के लिए आते हैं।
आचार्य बालकृष्ण जी मनस्वी तथा तपस्वी ब्रह्मचारी हैं। इन्होंने आत्मसाधना के साथ-साथ राष्ट्रसेवा को अपना धर्म समझा है। आचार्य बालकृष्ण का यह मानना है कि हर व्यक्ति के जीवन का एक लक्ष्य होता है और वह व्यक्ति अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लक्ष्य भेदन की ओर अग्रसर होता है। विश्वविख्यात पंतजलि योग पीठ में आचार्य बालकृष्ण की प्रतिष्ठा और सम्मान वर्तमान धन्वंतरि के रूप में हो रही है। आचार्य बालकृष्ण जी एक बहुत बड़ी संहिता लिख रहे हैं, जिसमें 5000 जड़ी-बूटी के बारे में वर्णन किया गया है। अभी तक इतिहास में केवल500 जड़ी-बूटी के बारे में ही लोगों को पता चल पाया है। आचार्य जी अनेक रोगियों को स्वस्थ्य कर चुके हैं, इन्होंने अब तक करीब दस लाख रोगियों को देखा है, जिनमें से आठ लाख लोगों का दस्तावेज प्रमाण भी मौजूद है। पंतजलि योग पीठ में हर दिन देश के अलग-अलग क्षेत्रों के लोग अपने रोगों का निदान कराने के लिए आते हैं।

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